लेखनी प्रतियोगिता -01-Apr-2023
नमन मंच
1/04/2023
आज का विषय
*सरहद के पार*
सरहद के पार भी होती है हजार सरहदें,
जो बांट देती है हम सबको
अलग-अलग सरहदों में।
कभी-कभी बना देती हैं एक दूजे का दुश्मन,
और कभी बना देती है एक दूजे का मित्र,
सरहद के पार भी होती हैं हजार सरहदें.....
बात अगर हम देशों की करें तो होती है वहां अलग सरहदें,
जो हमें बांध देती है नियम और कानून में,
अपने-अपने अहं और वर्चस्व की धुनों में।
लड़ मारने को तैयार रहते हैं सभी भूल कर अपनी हदें।
सरहद के पर भी होती है...
परिवार में भी होती हैं हजार सरहदें,
जो हमें बांध कर रखती हैं अपनी मर्यादाओं में,
और सरहद पार कर ले अगर कोई तो,
टूट जाते हैं सारे रिश्ते,
तो इसलिए हमें रहना है अपने-अपने सरहदों में,
ताकि बची रहें अपनी साख और अपनी जड़ें।
सरहदों के पार भी होती है हजार...
बड़ों के साथ होती है अपनी सरहदें,
बच्चों के साथ होती हैं अलग-अलग सरहदे,
गुरु शिष्य की भी होती है अपनी सरहदें,
जो जितना रहता है सरदों में वह कहलाता है उतना ही सभ्य और संस्कारी,
और जो पार कर जाता है अपनी सरहदों को,
तोड़ देता है सारी सीमायें,
फिर नहीं अपनाता है उसे कोई चाहे कर लो लाख कोशिशें।
सरहदों के पार भी होती है...
प्यार अगर करते हो किसी से,
तो करना वो भी सीमा में रहकर ।
जिस दिन सीमा टूट गई,
समझ लो फिर तुम नजरों से गए,
तो हे मानव!
मत कर पर अपनी सरहद को पार अग़र चाहिए अपनों से प्यार,
अब समझाती अंजलि सबको,
फिर तुम बोलो कि पहले क्यों नहीं कहें अपने विचार।
सरहदों के पार भी होती हैं हजार सरहदें..
स्व-रचित व मौलिक रचना
अंजलि धामा
Rajeev kumar jha
02-Apr-2023 11:52 AM
शानदार
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Alka jain
02-Apr-2023 11:13 AM
Nice
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Anjali Dhama
02-Apr-2023 07:37 AM
धन्यवाद आप दोनों का महोदय
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